किया है इश्क मगर मैं बिछड़ गया तन्हा

किया है इश्क मगर मैं बिछड़ गया तन्हा
उसे मैं देखकर हर बार गुजर गया तन्हा

याद आता है मुझे उसके जूड़े का बंधन
जो मेरे सीने को बांधे चला गया तन्हा 

वो कैसा दर्द भरा था उसकी आंखों में
जो मेरी आंखों में आके बह गया तन्हा

कहीं पे खोयी सी रहती थी वो उदासी में
रू ब रू उसके मैं आईना बन गया तन्हा

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